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फाइलेरिया उन्मूलन के लिए दी गई तकनीकी जानकारी

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  प्रयागरा ज : जनपद में फाइलेरिया की जाँच के लिए दो सप्ताह तक नाइट ब्लड सर्वे कराया जान है। इसके लिए सभी सम्बंधित स्वास्थ्य केन्द्रों के कर्मचारियों को फाइलेरिया पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। सी.एम.ओ. डॉ. प्रभाकर राय के निर्देशा पर जिले में फाइलेरिया की रोक थाम के लिए 4 मार्च से लेकर 17 मार्च तक नाईट ब्लड सर्वे होना है। सर्वे के बेहतर परिणाम के लिए सम्बंधित केन्द्रों के कर्मचारियों को फाइलेरिया क्लीनिक, नगरीय मलेरिया इकाई, प्रयागराज में मंगलवार को प्रशिक्षण दिया गया। प्रविधिज्ञों को अलग से प्रशिक्षित किया जा रहा जिला मलेरिया अधिकारी के.पी. द्विवेदी ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र धनूपुर, प्रतापपुर, माण्डा, बहरिया, चाका एवं कोटवा नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खरकोनी एवं तेलियरगंज के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रों में नाईट ब्लड सर्वे होना है। इसमें फाइलेरिया की जाँच के लिए 4 सेन्टीनल एवं 4 रैन्डम साइट्स चिन्हित की गई हैं। सर्वे टीम में लैब टेक्नीशियन, आशा, ए.एन.एम., एच.ई.ओ. के साथ ही बी.पी.एम. एवं बीसी.पी.एम. भी रहेंगी। प्रस्तावित आई.डी.ए. कार्यक्रम के अन्तर्गत चयनित सभी सी.ए...

नवजात शिशु देखभाल सप्ताह: पहले घंटे जरूर कराओ स्तनपान सुरक्षित होगी बच्चे की जान

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  प्रयागराज - नवजात की समुचित देखभाल उसके बचपन को खुशहाल बनाने के लिए बहुत ही जरूरी होती है । इसके अलावा शिशु मृत्यु दर को भी कम करने में इसकी बड़ी भूमिका है । इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 15 से 21 नवम्बर तक नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया जाएगा, जिसके तहत उन सभी बिन्दुओं पर हर वर्ग को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा जिसके जरिये शिशुओं को ‘आयुष्मान’ बनाया जा सके । शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जा सके राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने सूबे के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजकर नवजात शिशु देखभाल सप्ताह की प्रमुख गतिविधियों और जागरूकता कार्यक्रमों के बारे में जरूरी दिशा-निर्देश जारी किया है । सप्ताह के दौरान जनसामान्य को नवजात शिशु स्वास्थ्य के साथ बेहतर देखभाल के बारे में जागरूक किया जाएगा । कंगारू मदर केयर और स्तनपान को बढ़ावा देने के साथ ही बीमार नवजात शिशुओं की पहचान के बारे में भी जागरूक किया जाएगा । इसके अलावा सरकार द्वारा चलाये जा रहे बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में भी सभी को अवगत कराया जाएगा और इस दिशा में स्वैच्छिक संस्...

शादी में देरी का महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन सम्बन्धी निर्णयों पर होता है सकारात्मक असर

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  प्रयागराज-   एक नए अध्ययन में कहा गया है कि उचित सामाजिक वातावरण तथा सूचनाओं व सेवाओं संबंधी क्रियाओं को मजबूत करने से यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य परिणामों में काफी सुधार लाया जा सकता है। उपलब्ध विकल्पों के बारे में बातचीत करना भी ज़रूरी वर्ष 2015-16 और 2018-19 में उत्तर प्रदेश के 10-19 वर्ष की आयु के 10,000 से अधिक किशोर/ किशोरियों पर किये गए अध्ययन UDAYA (किशोरों और युवा वयस्कों के जीवन को समझना) के अनुसार सही उम्र में शादी करना, लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलाना, स्कूली शिक्षा के दौरान किशोर/ किशोरियों को गर्भनिरोधक विधियों की जानकारी देना, अविवाहित और विवाहित किशोर/ किशोरियों तक फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की पहुँच सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनमें युवा लोगों से प्रभावी संवाद करने की क्षमता विकसित करना कुछ ऐसे उपाय हैं जिनसे किशोर/ किशोरियों के यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है। इसके साथ ही गर्भ निरोधक साधनों तक युवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना तथा युवा जोड़ों और उनके परिवार के साथ युवा महिलाओं की गर्भनिरोधक जरूरतों, उनके अधिकारों और उपलब्ध विकल्पों के बारे में बातचीत करन...