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Showing posts with the label स्वास्थ्य और परिवार नियोजन

बोलने व सुनने में अक्षम बच्चो का उपचार संभव

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   प्रयागराज :  जन्म से सुनने और बोलने में सक्षम न होना एक गंभीर समस्या है जिसका असर आजीवन रह सकता है। यदि अभिभावक बच्चों की इन क्षमताओं को लेकर शुरुआती समय में सावधान रहें तो बच्चों को इस समस्या से बचाया जा सकता है। बच्चों में बोलने और सुनने की समस्या का सफल उपचार कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी से संभव है। कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अमित केसरी के अनुसार जन्म के बाद जब बच्चा सुनना शुरू करता है तो ही उसमें बोलने की क्षमता का विकास होता है। आमतौर पर छ: माह की आयु तक अभिभावकों को पता चल जाता है कि उनके बच्चे को सुनने में कोई समस्या है या नहीं। यही समस्या होती है तो तुरंत चिकित्सक या इ.एन.टी. विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी एक सफल उपचार है जिससे सुनने की क्षमता विकसित हो जाती है। लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि यह पांच वर्ष तक के बच्चों में ही सफल होती है। इसलिए बच्चे की आयु पांच वर्ष होने से पहले ही उपचार करवाना आवश्यक है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से संचालित ‘बचपन डे केयर सेन्टर’ दिव्यांगजन बच्चों की प्री-प्राथमिक पाठशाला है। स्वरूपरान...

महिलाओं व बच्चों के कल्याण के लिए सरकार की नई पहल शुरू

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   प्रयागराज :  महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की सभी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने नई पहल की है। इसके तहत अब महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की योजनाओं को तीन वृहद परियोजनाओं में समाहित कर संचालित किया जाएगा, जिसमें मिशन पोषण 2.0, मिशन वात्सल्य एवं मिशन शक्ति शामिल होंगे। मिशन शक्ति महिला व बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित सभी मिशन व योजनाओं का कंनर्वजेंस प्रोग्राम है। इसी में मिशन पोषण 2.0, मिशन वात्सल्य तथा मिशन सक्षम आंगनबाड़ी को शामिल किया गया है। देश में लगभग 68 फीसद आबादी महिलाओं एवं बच्चों की : वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 67.70 फीसद आबादी सिर्फ महिलाओं एवं बच्चों की ही है। देश के सतत एवं न्यायसंगत विकास के लिए महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा एवं उनका सशक्तिकरण बेहद जरुरी है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एक सुरक्षित माहौल में बच्चों की खुशहाली और सुपोषण सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध है। इसके साथ ही महिलाओं को सशक्त करने के लिए सुलभ, सस्ता, विश्वसनीय एवं सभी तरह के भेदभाव एवं हिंसा मुक्त माहौल प्रदान करने के लिए प्रयासरत है। महिला एव...

मॉडल गाँव बनाएंगे – घर-घर खुशहाली लाएंगे

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  प्रयागराज :   गाँव :में बदलाव की बयार के साथ ही हर किसी के जीवन में खुशहाली लाने के लिए मॉडल गाँव बनाने की अनूठी पहल पर गंभीरता से विचार चल रहा है । इसके पीछे सोच यह है कि अगर देश को विकसित और खुशहाल बनाना है तो सबसे पहले अपने गाँवों का चतुर्दिक विकास करना होगा क्योंकि सही मायने में भारत गाँवों में ही बसता है । इसी सोच को साकार करने और इसे सही मायने में धरातल पर उतारने में आईसीआईसीआई फाउंडेशन के सहयोग से पूरी एक टीम दिन-रात काम कर रही है । इस नवप्रयोग के प्रेरक (मेंटर) आईएएस अधिकारी हीरा लाल ने भी एक खाका तैयार करने में जुटे हैं जो कि गाँव के लोगों को तरक्की की राह दिखा सके। उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने पर पूरा जोर हीरा लाल का कहना है कि बांदा के जिलाधिकारी के कार्यकाल के दौरान वह मॉडल गाँव बनाने की पहल कर चुके हैं, जिसके सकारात्मक परिणामों से उत्साहित होकर उस नवप्रयोग को अब पूरे प्रदेश में लागू करने को कुछ संगठन और अधिकारी आगे आये हैं । इस पहल के तहत सर्वप्रथम गाँव घोषणा पत्र (विलेज मेनिफेस्टो) के माध्यम से लोगों को इस सोच के बारे में अवगत कराना है, जिसके जरिये गाँव में विका...

अभिभावकों की जागरूकता बनेगी मासूमों का सुरक्षा कवच

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प्रयागराज: कोविड-19 संक्रमण के आंकड़ों में लगातार कमी दर्ज होना राहत की बात है। इसी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने कोरोना गाइडलाइन जारी कर स्कूलों को पूर्ण रूप से खोलने की अनुमति दे दी है। महीनों से घर में बैठे बच्चे स्कूल खुल जाने से बेहद खुश व उत्साहित हैं। लेकिन कोरोना पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुआ है ऐसे में अभिववकों कि चिंता स्वाभाविक है।  कोरोना पॉजिटिव बच्चों में ज़्यादातर लक्षण एसिम्टोमेटिक  बच्चों के स्वास्थ के लिए अभिववकों को भी सतर्क रहने की जरूरत  परिवार का कोई सदस्य कभी पॉज़िटिव रहा है तो बच्चे को स्कूल ना भेजें  यात्रा से लौटे अभिवावक अपनी आरटीपीसीआर जांच निगेटिव आने पर ही बच्चे को स्कूल भेजें कोरोना संक्रमण के मामले कम हुए हैं पर कोरोना अभी भी खत्म नहीं हुआ है। बच्चों में कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसका सबसे बड़ा कारण बच्चों की कमजोर प्रतिरोधक क्षमता है। ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की रिपोर्ट के मुताबिक 12 साल से कम उम्र के सभी कोरोना पॉजिटिव बच्चों में कोरोना के ज़्यादातर लक्षण एसिम्टोमैटिक देखने को मिले हैं। यह लक्षण बिल्कुल सामान्य होते हैं। संक्रमित व्यक...

टेलीमेडिसिन सेवाओं से मिल रही लोगों को राहत

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प्रयागराज- ग्रामीण स्तर पर उच्च स्तरीय स्वास्थ्य परामर्श सेवाओं के लिए जनपद के 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेलीमेडिसिन सेवाएं दी जा रही हैं । टेलीमेडिसिन सेवाओं के अंतर्गत 13 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ऑनलाइन परामर्श दिया जा रहा है। टेलीमेडिसिन सेवा के नोडल व ए.सी.एम.ओ. डॉ. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि जिले के 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेलीमेडिसिन सेवाएं दी जा रही है। इनमें बाल रोग, सामान्य औषधि, त्वचा रोग, मूत्र रोग, हड्डी रोग, तंत्रिका, ह्रदय रोग, अन्तःस्राव, किडनी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, फिजियोथेरेपी, गैस्ट्रो एवं कैंसर रोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सी.एच.सी. पर स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधायें सीमित होती हैं। उच्च सेवाओं के लिए व्यक्ति को जिला चिकित्सालय या फिर मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। जबकि टेलीमेडिसिन सेवाएं उपलब्ध होने से व्यक्ति या मरीज को वहीं उच्च स्वास्थ्य परामर्श मिल जाता है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेलीमेडिसिन सेल बनाए गए हैं। जब किसी व्यक्ति को उच्च परामर्श की आवश्यकता होती है तो सी.एच.सी. के चिकित्सक व्यक्ति को टेलीमेडिसिन...

मिशन शक्ति: प्रयागराज की महिलाएं व बच्चे आज डीएम से करेंगे ‘हक की बात

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प्रयागराज/स्वास्थ समाचार: मिशन शक्ति अभियान के तहत बुधवार (25 नवम्बर) को महिलाएं और बच्चे अपने जनपद के जिलाधिकारी से सीधे तौर पर ‘हक़ की बात’ करेंगी। इसके लिए हर जिले में दो घंटे के पारस्परिक संवाद का आयोजन किया जाएगा, जिसमें महिलायें और बच्चे स्थानीय समस्याओं के साथ ही यौन शोषण, घरेलू हिंसा, दहेज़, आर्थिक समस्याओं, शिक्षा तक पहुंच की उपलब्धता की समस्या आदि पर जिलाधिकारी से बात करेंगी, अपने सुझाव देंगी और जिलाधिकारी द्वारा मौके पर ही निवारण हेतु संबधित विभागों या अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए जाएंगे। इसके लिए हर जिले के प्रोबेशन अधिकारी को पहले ही अपने जिले के जिलाधिकारी से तालमेल कर समय निर्धारित करने को निर्देशित किया जा चुका है। निदेशक महिला कल्याण व मिशन शक्ति के नोडल अधिकारी मनोज कुमार राय का कहना है कि जिलाधिकारी से सीधे हक़ की बात करने के लिए जिलों में वेबिनार, डेडिकेटेड फोन लाइन, वीडियो कांफ्रेंसिंग आदि माध्यमों का प्रयोग किया जाएगा। इस आयोजन से महिलाओं को अपनी समस्याओं को उचित फोरम पर उठाने का जहाँ मौका मिलेगा वहीँ अपनी बात को उठाने में आड़े आने वाली हिचक भी दूर होगी। महिलायें तथ...

शादी में देरी का महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन सम्बन्धी निर्णयों पर होता है सकारात्मक असर

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  प्रयागराज-   एक नए अध्ययन में कहा गया है कि उचित सामाजिक वातावरण तथा सूचनाओं व सेवाओं संबंधी क्रियाओं को मजबूत करने से यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य परिणामों में काफी सुधार लाया जा सकता है। उपलब्ध विकल्पों के बारे में बातचीत करना भी ज़रूरी वर्ष 2015-16 और 2018-19 में उत्तर प्रदेश के 10-19 वर्ष की आयु के 10,000 से अधिक किशोर/ किशोरियों पर किये गए अध्ययन UDAYA (किशोरों और युवा वयस्कों के जीवन को समझना) के अनुसार सही उम्र में शादी करना, लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलाना, स्कूली शिक्षा के दौरान किशोर/ किशोरियों को गर्भनिरोधक विधियों की जानकारी देना, अविवाहित और विवाहित किशोर/ किशोरियों तक फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की पहुँच सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनमें युवा लोगों से प्रभावी संवाद करने की क्षमता विकसित करना कुछ ऐसे उपाय हैं जिनसे किशोर/ किशोरियों के यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है। इसके साथ ही गर्भ निरोधक साधनों तक युवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना तथा युवा जोड़ों और उनके परिवार के साथ युवा महिलाओं की गर्भनिरोधक जरूरतों, उनके अधिकारों और उपलब्ध विकल्पों के बारे में बातचीत करन...