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सुनिए : कोरोना विजेताओं ने क्यों बदल डाली अपनी जीवन शैली

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प्रयागराज - कोविड-19 संक्रमण के आंकड़ों में दर्ज होती कमी सकारात्मक उम्मीद पैदा कर रही है। एक तरफ लोगो ने जहां इस वैश्विक महामारी से बचने के लिए मास्क और दो गज से दूरी को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है वहीं शहर के कई कोरोना विजेताओं ने अपनी जीवन शैली ही बदल डाली है। कोरोना विजेताओ ने कोविड-19 से पहले और वर्तमान के जीवन में क्या बदलाव किया है। जीत पाल सिंह कमलाकुंज अपार्टमेंट के कोरोना विजेता जीत पाल सिंह (54) ने बताया कि ‘बिज़नस पार्टनर्स के साथ मीटिंग के लिए कोरोना-काल में अक्सर दूसरे राज्य व शहर आना-जाना जारी रहा। इस बीच मैं व मेरे सहयोगी सभी ने प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन किया। पर मैं कैसे संक्रमित हो गया यह मेरे लिए हैरत का विषय था। अभी मैं स्वस्थ हूँ पर प्रयास यही रहता है कि ऑनलाइन माध्यम से बिज़नस पार्टनर्स से समन्वय स्थापित करूं। अतिआवश्यक होने पर ही कहीं जाता हूँ वह भी पूरी एहतियात के साथ। विपत्तियाँ अक्सर दुख के साथ कई सुख की संभावनाएं उजागर करती हैं, ऐसे में जीवन में सकारात्मक पहलू हमें तलाशने चाहिए। विनोद यादव कोरोना विजेता जीवन ज्योति क्षेत्र के चौकी इंचार्ज विनोद यादव ...

हौसले को सलाम: इक्षाशक्ति से 80 प्रतिशत निष्क्रिय फेफड़ा होने के बाद भी जीत ली कोरोना से जंग

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इस खबर ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खीचा॥  प्रयागराज:  पूरा विश्व कोविड-19 बीमारी की चपेट में है इसकी वजह से इस बीमारी को लेकर लोगों में डर और चिंता बढ़ने के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर भी बहुत बुरा असर पड़ रहा है I चिकित्सकों की माने तो इसका सबसे ज्यादा खतरा अधिक उम्र और अन्य बीमारी से ग्रसित लोगों को है इसके बावजूद बहुत से लोग कोरोना से ठीक भी हो रहे है इसमें उनकी सकारात्मक सोच और मज़बूत इच्छाशक्ति को अत्यधिक कारगर माना जा रहा है I 65 वर्षीय प्रभात कुसुम गुप्ता एक जीता-जागता उदाहरण हैं जिन्होंने एक लाइलाज बीमारी से ग्रसित होने के बाद भी अपनी सकारात्मक सोच और मजबूत इच्छाशक्ति से कोरोना को हरा दिया I फेफड़े 80 प्रतिशत निष्क्रिय जनपद के अल्लापुर क्षेत्र की रहने वाली 65 वर्षीय प्रभात कुसुम गुप्ता पिछले 14 साल से फेफड़े की लाइलाज बीमारी इंटरस्टीशियल लंग डिज़ीज़ (आई.एल.डी.) से लड़ रही हैं। इनके फेफड़े लगभग 80 प्रतिशत निष्क्रिय अवस्था में हैं जिसके इलाज के लिए वह 2006 में दिल्ली के एम्स भी गई, जाँच के बाद शुरुआती लक्षण टी.बी. के मिलने पर उपचार भी हुआ I कुछ समय बाद इंटरस्टीशियल लंग डिज़ीज़ (आई.एल.ड...