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प्रयागराज में विशेष टीकाकरण अभियान की हुई शुरुआत

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  प्रयागराज:    कोविड-19 के चलते किये गए लॉकडाउन के दौरान स्वास्थ्य विभाग के कई कार्यक्रमों पर असर पड़ा था जिसमें नियमित टीकाकरण भी शामिल था। इससे कुछ बच्चे व गर्भवती टीकाकरण से छूट गए। इन बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए जनपद में स्वास्थ्य विभाग विशेष टीकाकरण अभियान चला रहा है जिसकी शुरुआत सोमवार को जिला महिला चिकित्सालय (डफरिन) में की गई। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ.अमित श्रीवास्तव ने बताया कोरोना के चलते टीकाकरण से छूट गए सभी बच्चों के टीकाकरण के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।इसके अन्तर्गत दो नवम्बर से लेकर अगले तीन माह तक प्रत्येक सोमवार टीकाकरण सत्र चलाये जायेंगे।यह सत्र वर्तमान टीकाकरण सत्रों के अलावा चलाये जायेंगे।टीकाकरण के लिए माइक्रोप्लान तैयार किया जा चुका है जिसमें सोमवार को पहला सत्र आयोजित किया गया है। प्लान के अन्तर्गत शहरी क्षेत्रों में 496 और ग्रामीण क्षेत्रों में 1926 टीकाकरण सत्रों का आयोजन किया जायेगा । दस्तक अभियान के अन्तर्गत 15 अक्टूबर तक आशा कार्यकर्ताओं ने घर-घर जा कर टीकाकरण से छूटे बच्चों का चिन्हीकरण भी किया था जिनके टीकाकरण के लिए ...

करवाचौथ: भूखे रहने से कम हो जाती है प्रतिरोधक क्षमता बना रहेगा कोरोना का डर

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प्रयागराज :  वैश्विक महामारी कोरोना के बीच अपने सुहाग की सलामती के लिए 4 नवंबर (बुधवार) को महिलाएं पूरा दिन निर्जला उपवास रहेंगी। पूरे समय निर्जला होने के कारण महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता का स्तर गिर जाने से वह कोरोना संक्रमण की चपेट में आ सकती हैं। इसलिए कोरोना को हराने के लिए जरूरी है कि अपना इम्यून सिस्टम (प्रतिरोधक क्षमता) मजबूत रखा जाये। इस वर्ष करवाचौथ में बेहद अहतियात बरतने की जरुरुत है। भूखे रहने से कम हो जाती है प्रतिरोधक क्षमता कॉल्विन हॉस्पिटल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. सुषमा श्रीवास्तव ने बताया कि करवाचौथ का निर्जला उपवास बेहद कठिन प्रक्रिया है। लम्बे समय तक भूखे रहने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। पर आस्था से जुड़े होने के नाते हर सुहागन के लिए यह दिन बेहद खास होता है। लेकिन ध्यान रहे ऐसी महिलाएं जो गर्भवती हों या स्तनपान करती हों, रक्तचाप व मधुमेह या हृदय संबंधी किसी संक्रमण व बीमारी से ग्रसित हों तो उन्हें चिकित्सीय परामर्शनुसार नियमित दवा का सेवन जरूरी है। ऐसी स्थिति में पूरे दिन निर्जला उपवास रहना उनके स्वास्थ पर विपरीत असर डाल सकता है। कोशिश कर...

कोविड-19 :सामाजिक भेदभाव तिरस्कार के खिलाफ खड़ा किया जाएगा युवाओं को

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  प्रयागराज -  कोविड-19 महामारी संक्रमण का प्रसार धीरे-धीरे कम हो रहा है। इससे ठीक होने वाले व्यक्तियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इन सबके बीच कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्तियों के साथ समाज में भेदभाव और तिरस्कार भी हो रहा है। कोविड-19 के दौर में लोगों में फैले तिरस्कार व भेदभाव के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से युवाओं की मदद ली जाएगी जिसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक निर्देशिका जारी किया है। सामाजिक भेदभाव तिरस्कार के खिलाफ खड़ा किया जाएगा जारी निर्देशिका के अनुसार युवाओं को सामाजिक भेदभाव तिरस्कार के खिलाफ खड़ा किया जाएगा। निर्देशिका में बताया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में तिरस्कार का मतलब होता है आपकी बीमारी के चलते कोई व्यक्ति या समुदाय आपको नकारात्मकता से देखता है। महामारी के दौर में इसका मतलब यह है कि किसी एक बीमारी से जुड़े लोगों को चिन्हित कर उनके साथ भेदभाव या अलग व्यवहार किया जाए, उनकी सामाजिक स्थिति और छवि को नुकसान पहुंचाया जाए। इस तरह का व्यवहार उन लोगों को जो खुद बीमारी से जूझ रहे हो या उनकी देखभाल करने वाले परिवार स...

कोरोना के संक्रमण के बीच जीवन के विभिन्न पहलुओं पर बदली जनता की सोच : सिटिज़न जर्नलिस्ट

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सिटिज़न जर्नलिस्ट:  पूरी दुनिया कोविड-19 संक्रमण की चपेट में है। इसकी वजह से हर वर्ग के व्यक्तियों की जीवनशैली प्रभावित हुयी है। ऐसे में शहर का आम आदमी इस बदलाव को किस नजरिए से देखता है यह जानने के लिए हमने बात की टैगोर टाउन क्षेत्र की रहने वाली रंजना निगम से। फैलने का एकमात्र कारण रंजना ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. व बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की है और पेशे से एंजेल ब्यूटी स्पा की ब्यूटीशियन व संचालक हैं। एक आत्मनिर्भर व जागरूक महिला होने के नाते वह कोरोना संक्रमण पर अपना अनुभव साझा करते हुए कहती हैं कि कोरोना का पूरी दुनिया में फैलने का एकमात्र कारण जागरुकता का अभाव था। शुरुआती समय पर ही यदि सभी देश जागरूक होकर चेत गए होते तो यह महामारी वैश्विक नहीं हो पाती। आमूलचूल आधुनिक परिवर्तन कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच मनुष्य ने ऐसा दौर देखा है जिससे जीवन के तमाम पहलुओं पर उसकी सोच बदल गई है। मास्क का सही व लगातार उपयोग व हाथ धुलने के तरीके व लाभ से संबन्धित जानकारी को जागरूकता के बाद लोगों ने अपनी जीवनशैली से जोड़ दिया है। यह बदलाव साबित करता है कि सेहत के साथ-साथ अब सतर्कता मन...

क्षय रोग उन्मूलन को लेकर भारत सरकार प्रतिबद्ध : जय प्रताप सिंह

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  प्रयागराज:   देश से वर्ष 2025 तक क्षय रोग यानि टीबी उन्मूलन के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को समय से पहले पूरा करने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह गंभीर है । इस संकल्प को सही मायने में धरातल पर उतारने को लेकर नए कार्यक्रम शुरू करने के साथ ही पहले से चल रहे कार्यक्रमों में और तेजी लायी जा रही है । टीबी उन्मूलन को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों और योजनाओं के बारे में बुधवार को प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने विस्तार से मीडिया को जानकारी दी । बलगम की जांच करायी जाएगी उन्होंने बताया कि कोविड-19 के दौरान टीबी मरीजों की खोज और पहचान के लिए चलाये जा रहे अभियान पर भी असर पड़ना स्वाभाविक था लेकिन आगामी एक नवम्बर से प्रदेश के 29 जिलों में एक बार फिर सघन टीबी रोगी खोज (एक्टिव केस फाइंडिंग) अभियान शुरू होने जा रहा है । मुख्यमंत्री एक नवम्बर को लखनऊ से इस अभियान का शुभारम्भ करेंगे । दस दिन तक चलने वाले इस अभियान के दौरान घर-घर जाकर टीम लोगों की स्क्रीनिंग करेगी और जिनमें लक्षण नजर आयेंगे उनके बलगम की जांच करायी जाएगी । उन्होंने टीबी के...

रक्तदान से नहीं फैलता कोर एक का रक्तदान बचाए चार की जान

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प्रयागराज:   वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान रक्तदान करने वालों की कमी देखी जा रही है। लोगों के भीतर भ्रम की स्थिति हैं कि वे रक्तदान करें या नहीं, अस्पताल जाने पर संक्रमण न हो जाये या रक्तदान से रोग प्रतिरोधक क्षमता न घट जाये जैसे कई सवालों के चलते लोग रक्तदान से कतरा रहे हैं। ऐसी स्थिति में लोगों को रक्तदान हेतु जागरूक करने और उनके भ्रम दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग काफी प्रयास कर रहा है जिसमें कई निजी संगठनों का साथ भी मिल रहा है। दिशानिर्देश जारी मोतीलाल नेहरु मंडलीय चिकित्सालय, कॉल्विन अस्पताल में ब्लड बैंक के परामर्शदाता सुशील तिवारी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान लोगों को डर था कि यदि वे रक्तदान करने चिकित्सालय या ब्लड बैंक गए तो वह संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं, ऐसा भ्रम भी था कि रक्त देने से कोरोना होने की संभावना है। इस कारण कोरोना की शुरुआत में रक्तदान बिलकुल ही बंद था पर अब काफी सुधार हुआ है। एन.बी.टी.सी. (नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूज़न काउंसिल) और एस.बी.टी.सी. (स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूज़न काउंसिल) ने रक्त को सुरक्षित रखने और संक्रमण को रोकने के लिए पहले ही दिशानिर्देश जारी क...

समय रहते हो सके गर्भावस्था समस्याओं का निदान - कारगर है प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान

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प्रयागराज : गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने और मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रत्येक माह की 9 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अन्तर्गत गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जाँच की जाती है I स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना काल में भी गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल की सेवाएं देने का पूरा प्रयास किया गया है I जन्म लेने वाले बच्चे और माता दोनों का स्वास्थ्य व जीवन सुरक्षित रहे परिवार कल्याण नोडल ए.सी.एम.ओ. डॉ. सत्येन राय ने कहा कि हमारा उद्देश्य यही रहता है कि जन्म लेने वाले बच्चे और माता दोनों का स्वास्थ्य व जीवन सुरक्षित रहे I इसके लिए सुरक्षित मातृत्व अभियान के अन्तर्गत दूसरी व तीसरी तिमाही की सभी गर्भवती महिलाओं की कम से कम एक जाँच एम.बी.बी.एस. चिकित्सक या प्रसूति एवं स्त्री विशेषज्ञ के द्वारा करायी जाये I बच्चे का समुचित विकास हो सके जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक अशफ़ाक अहमद ने बताया कि ग्रामीण परिवेश में सभी गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्ण देखभाल हेतु प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभ...