सारथी वाहन देगा पुरुष नसबंदी का संदेश, सीएमओ ने दिखाई हरी झंडी

प्रयागराज : जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए जनपद का स्वास्थ्य महकमा लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में मंगलवार को पुरुष नसबंदी पखवाड़े के अंतर्गत मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से पाँच सारथी वाहन को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ नानक सरन व अपर मुख्यचिकित्साधिकारी (आरसीएच) नोडल परिवार कल्याण डॉ॰ सत्येन राय ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह सारथी वाहन शविवार तक चलने वाले पुरुष नसबंदी पखवाड़े में जनसमुदाय को पुरुष नसबंदी के प्रति जागरूक करेगी। इसमें दो सारथी वाहन नगर क्षेत्र में व चिन्हित सभी 20 ब्लाकों में 3 सारथी वाहन अगले 4 दिनों तक ग्रामीण स्तर पर सुदूर क्षेत्रों में कार्यक्रम के प्रचार प्रसार के उद्देश्य से चलाए गए हैं। पखवाड़ा 4 दिसंबर तक चलेगा।

 

सीएमओ नानक सरन ने बताया कि परिवार नियोजन की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं के कंधों पर नहीं रहनी चाहिए। इसलिए परिवार पूरा कर चुके दंपति को नसबंदी सेवा प्रदान की जा रही है। बीते छह वर्ष से प्रदेश में प्रयागराज पुरुष नसबंदी में प्रथम पायदान पर रहा है। पुरुष नसबंदी जन्म दर को रोकने का एक स्थायी, प्रभावी और सुविधाजनक उपाय है। पुरुष नसबंदी को लेकर जनपद के लोगों में जागरूकता आए व जो मिथक हैं उन्हें दूर करने के लिए सारथी वाहन व अन्य माध्यम से क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चल रहे पुरुष नसबंदी पखवाड़े को सफल बनाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए पुरुष समुदाय को यह बताया जाएगा की नसबंदी से पुरुष की यौन क्षमता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता बल्कि पुरुष नसबंदी से वैवाहिक जीवन और सुखमय हो जाता है। परिवार नियोजन विशेषज्ञों की भी राय ली जा रही है व उन्हें लोगों को जागरूक करने की भी ज़िम्मेदारी दी गई है।“

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी परिवार नियोजन कार्यक्रम नोडल डॉ सत्येन राय ने बताया कि परिवार नियोजन के स्थायी साधनों को अपनाने के लिए पुरुषों का सहयोग मिल रहा है। पखवाड़ा के अंतर्गत जनपद के प्रत्येक ब्लॉक में ब्लॉक में 10 पुरुषों की नसबंदी होना तय हुआ है। इस बीच परिवार पूरा कर चुके पुरुष लाभार्थी की चिन्हित स्वास्थ्य इकाइयों पर नसबंदी की जा रही है। 28 नवंबर को कुल सात पुरुषों की व 29 नवंबर को 10 पुरुषों की नसबंदी की गई है। वहीं यह देखा गया है की परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों (आइयूसीडी , कंडोम, अंतरा इंजेक्शन, माला (एन) की गोलियां, छाया) को अपनाने में पहले की अपेक्षा समुदाय का रुझान बढ़ा है।“

नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दारागंज प्रथम के सर्जन (एनएसवी) डॉ. अनिल ने बताया कि पुरुष नसबंदी जन्म दर को रोकने का एक स्थायी, प्रभावी और सुविधाजनक उपाय है। महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी बहुत आसान है। यह एक मामूली सी शल्य क्रिया है। इसमें अस्पताल में भर्ती होने की भी जरूरत नहीं पड़ती। पाँच मिनट के इस ऑपरेशन में बस चींटी के काटने जितना ही एहसास होता है। इसके आधे घंटे बाद पुरुष चलकर स्वयं घर जा सकता है। जबकि महिला नसबंदी कराने वाली महिला लाभार्थी को पूरी तरह स्वस्थ होने में एक माह लगता है। महिला नसबंदी के मुकाबले यह न सिर्फ सरल है बल्कि कारगर भी है। वैवाहिक जीवन इससे और भी सुखमय हो जाता है। पुरुष नसबंदी के बाद किसी भी प्रकार की कमजोरी नहीं होती है।“

छह वर्ष के यह हैं आकंड़ें

जिला परिवार नियोजन एवं सामग्री प्रबंधक सचिन चौरसिया ने बताया कि पुरुष नसबंदी पखवाड़े के दौरान वर्ष 2016 में 52, 2017 में 85 व 2018 में 84 पुरुषों ने नसबंदी कराई थी। वर्ष 2019 में 85 लोगों ने ही नसंबदी कराई। वर्ष 2020 में 113 लोगों ने नसबंदी कराई थी। 2021 में 62 लोगों ने नसबंदी कराई थी। जनपद की समस्त स्वास्थ्य इकाइयों पर प्रचुर मात्र में परिवार नियोजन की सामाग्री उपलब्ध है। इस पखवाड़े के दौरान परिवार नियोजन की अन्य सुविधाएं भी दी जा रही हैं

 

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